Wednesday, September 12, 2007

मुझे आज़ाद होना है

मेरे शब्द खो गये, मैं बेचैन हूं,

कण्ठ दो मुझे, मुझे आवाज़ होना है



मुझे जीना नहीं आता, ना ही सीखना चाहता,

काल दो मुझको, मुझे आज़ाद होना है



प्रथम या अन्तिम कोई, स्थान मत छोड़ो,

मुझे रुतबा नहीं आता, मुझे अरमान होना है



शिकायत की सी भाषा है, मगर सब वेदनायें हैं,

मेरा नाम मत लिखो, मुझे गुमनाम होना है



ना चाहूं भेंट मैं बनना, ना ही ईनाम के लायक,

गिरा दो उसकी झोली में, मुझे बस दान होना है



मेरे हाथों में अक्षर हैं और मुख पे सन्नाटा,

कुछ शर्म दो मुझको, मुझे इन्सान होना है



मुझे छूना नहीं आता, मुझे बस तोड़ देना है,

बेबस सा भले ही हूं, मुझे अधिकार होना है



सुनूंगा आह फिर भी मैं, उनके भी कान होते हैं,

मुझे दीवार चुनवा दो, जरा बेजान होना है



जो कहना है कभी सीधे से कह नहीं पाता,

कोई सब मुश्किलें फेंको, मुझे आसान होना है



नियम कुछ मैं नहीं मानूं, पुरानी राह ना जानूं,

हदें सब तोड़ दूंगा मैं, मुझे आकाश होना है



मेरे चक्कर में पर सारे जमाने को नहीं भूलो

मुझे बस आज रहना है और कल कूच होना है



सुनो तुम ध्यान से हर बात पे कान तो रखना

न जाने किस की साजिश है, मुझे बलिदान होना है



सुनो ना गौर से मुझको, ना ही मायने सोचो,

अपना काम निपटाओ, मुझे बेकार होना है



बैठो फ़रिश्तों से जरा सुलह तो कर लें,

मेरा भी एक सपना है, मुझे भगवान होना है



समझ में जो नहीं आया, उसे सोचो ना रह रहकर,

ये दिल से बात निकली है, जरूरी दिल का होना है

3 comments:

उन्मुक्त said...

अच्छी कविता है हिन्दी में और भी लिखिये

SAM said...

mast hai yaar solanki...!!!!really awesome.keep up the good work

Ashwini said...

Solanki you are simply best...
:-)